Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवशयनी एकादशी 1908 गुरु 9 जुलाई या शुक्र 10 जुलाई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में देवशयनी एकादशी 1908 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 9 जुलाई
वैष्णव
शुक्रवार 10 जुलाई
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
Ipameri में गुरु 9 जुलाई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 10 जुलाई
वैष्णव · शनिवार 11 जुलाई
देवशयनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 9 जुलाई
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06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 10 जुलाई
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10:44–17:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 10 जुलाई
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06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 11 जुलाई
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06:44–17:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में देवशयनी एकादशी गुरु 9 जुलाई या शुक्र 10 जुलाई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवशयनी एकादशी गुरु 9 जुलाई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 10 जुलाई को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:05 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:05 से 05:04 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:04 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:05 गुरु से 05:04 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 9 जुलाई को सूर्योदय पर है, 06:37: गुरु 9 जुलाई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 9 जुलाई को दशमी 06:05 तक है, अरुणोदय (05:01–06:37) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:04 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 10 जुलाई को व्रत रखते हैं: शुक्र 10 जुलाई।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 10 जुलाई, 10:44–17:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 10 जुलाई 05:04 से शनि 11 जुलाई 03:18 तक है; हरिवासर 10:37 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:51 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 11 जुलाई, 06:44–17:52 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 11 जुलाई को 03:18 पर, रात में, अरुणोदय (05:01) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:37) से सूर्यास्त (17:45) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।