छठ 2025 सोम 27 अक्टूबर
नई दिल्ली में संध्या अर्घ्य: 17:40 IST
त्योहार · 30 शहर, हर शहर अपने सूर्योदय और सूर्यास्त पर, अपने समय में
छठ 2025 कब है?
सोमवार 27 अक्टूबर
कार्तिक शुक्ल षष्ठी
छठ संध्या अर्घ्य कितने बजे है?
छठ का समय: संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य
नई दिल्ली · IST
- सोमवार 27 अक्टूबर
-
17:40संध्या अर्घ्यसूर्यास्त पर · Tithika की परिपाटी
- मंगलवार 28 अक्टूबर
-
06:30उषा अर्घ्यसूर्योदय पर · Tithika की परिपाटी
30 शहरों में छठ संध्या अर्घ्य
हर शहर का समय उसके अपने ज़ोन में।
भारत
नेपाल
खाड़ी देश
दक्षिण-पूर्व एशिया
कोई और स्थान?
उस स्थान का छठ · संध्या अर्घ्य 2025 खुलेगा
राज्य और देश के अनुसार छठ 2025
हर एक पर वहाँ की छठ 2025: तारीख़ और हर शहर का संध्या अर्घ्य।
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देश
छठ क्यों मनाई जाती है? कथा
छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य का पर्व है: व्रती उपवास रखकर पानी में खड़े होते हैं और डूबते, फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं; यह मुख्य रूप से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।
छठ में सूर्य की पूजा जीवन और आरोग्य देने वाले देवता के रूप में होती है। इसकी कोई एक कथा नहीं है; महाभारत में जल में खड़े होकर सूर्य की उपासना की एक कथा मिलती है।
पांडव वनवास को गए तो बहुत-से ब्राह्मण उनके साथ चल पड़े, और युधिष्ठिर के पास उन्हें खिलाने को अन्न न था। पुरोहित धौम्य की सलाह पर उन्होंने जल में खड़े होकर सूर्य के अनेक नामों वाले स्तोत्र से उनकी स्तुति की। स्तोत्र कहता है कि जो षष्ठी या सप्तमी को सूर्य की पूजा करता है, उस पर लक्ष्मी की कृपा होती है।
सूर्य प्रकट हुए और युधिष्ठिर को ताँबे का एक पात्र दिया। जब तक द्रौपदी स्वयं भोजन न कर ले, उसमें पका अन्न कभी ख़त्म नहीं होता था, इसलिए वनवास के बारह वर्षों में पांडवों के यहाँ से कोई अतिथि भूखा नहीं लौटा।
स्रोत: महाभारत, वन पर्व, अनु. के. एम. गांगुली (पी. सी. रॉय, 1884), अनुभाग 3; जी. ए. ग्रियर्सन, बिहार पेज़ेंट लाइफ़ (1885), § 1442
छठ की पूजा विधि और सामग्री
छठ चार दिन का पर्व है। व्रती पहले दिन स्नान करके एक बार शुद्ध भोजन करते हैं, दूसरे दिन शाम की खीर तक उपवास रखते हैं, और तीसरी शाम नदी या तालाब में खड़े होकर बाँस के सूप में ठेकुआ, फल और गन्ना लिए डूबते सूर्य को दूध-जल का अर्घ्य देते हैं। चौथे दिन भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर प्रसाद से व्रत खोला जाता है। महाभारत का सूर्य-स्तोत्र कहता है कि षष्ठी या सप्तमी को सूर्य की पूजा करने वाले पर लक्ष्मी की कृपा होती है।
नई दिल्ली · IST
स्रोत: इनक्रेडिबल इंडिया (पर्यटन मंत्रालय), छठ पूजा, चार दिन; जी. ए. ग्रियर्सन, बिहार पेज़ेंट लाइफ़ (1885), § 1442; महाभारत, वन पर्व, अनु. के. एम. गांगुली (पी. सी. रॉय, 1884), अनुभाग 3
छठ: व्रत के नियम
छठ का लंबा उपवास खरना की शाम खीर के बाद से चौथी सुबह उगते सूर्य के अर्घ्य तक रखा जाता है, और अधिकतर व्रती इस बीच जल भी नहीं लेते। जो पूरा व्रत नहीं रख सकते, वे अर्घ्य और प्रसाद में साथ देते हैं, और व्रत कौन रखेगा यह हर परिवार तय करता है।
नई दिल्ली · IST
स्रोत: इनक्रेडिबल इंडिया (पर्यटन मंत्रालय), छठ पूजा, चार दिन
छठ सोम 27 अक्टूबर को क्यों है?
नई दिल्ली में
छठ · संध्या अर्घ्य सोम 27 अक्टूबर को है: उस शाम सूर्यास्त पर षष्ठी है।
सूर्यास्त (17:40) पर षष्ठी। षष्ठी: 06:05 से 08:00 मंगल तक।
षष्ठी 08:00 पर समाप्त; सूर्यास्त (17:39) पर सप्तमी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। रेखा: सूर्यास्त। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात।
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त पर दिया जाता है। षष्ठी सोम 27 अक्टूबर को 06:05 से मंगल 28 अक्टूबर को 08:00 तक है, इसलिए सूर्यास्त पर वह केवल सोम 27 अक्टूबर को है, 17:40 पर। छठ · संध्या अर्घ्य का समय बताने वाला कोई ग्रंथ नहीं मिला; सूर्यास्त Tithika की परिपाटी है।
नियम
कार्तिक शुक्ल षष्ठी
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त पर दिया जाता है।
- स्मार्त
- वह शाम जिसके सूर्यास्त में षष्ठी हो: Tithika की परिपाटी, क्योंकि कोई ग्रंथ समय नहीं बताता।
- वैष्णव
- स्मार्त वाला दिन।
हर शहर की तारीख़ और समय उसके अपने सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाले गए हैं; हर शहर का पेज कारण चित्र में दिखाता है।