tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 2083 मंगल 11 मई या बुध 12 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 2083 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 11 मई

वैष्णव

बुधवार 12 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में मंगल 11 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 12 मई

पारण समय
12:55–17:48
4 घं 53 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 13 मई

पारण समय
06:30–08:21
1 घं 51 मि

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 11 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 12 मई
  • 12:55–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 12 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 13 मई
  • 06:30–08:21पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी मंगल 11 मई या बुध 12 मई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अपरा एकादशी मंगल 11 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 12 मई को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:55 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:55 से 06:27 बुध तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 06:27 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:55 मंगल से 06:27 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 11 मई को सूर्योदय पर है, 06:29: मंगल 11 मई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 11 मई को दशमी 04:55 तक है, अरुणोदय (04:53–06:29) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:27 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 12 मई को व्रत रखते हैं: बुध 12 मई।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 12 मई, 12:55–17:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 12 मई 06:27 से गुरु 13 मई 08:21 तक है; हरिवासर 12:55 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:45 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · गुरु 13 मई, 06:30–08:21

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 12 मई 06:27 से गुरु 13 मई 08:21 तक है; हरिवासर 12:55 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 13 मई को सूर्योदय (06:30) से होता है।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।