Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 2081 पारण समय 06:37–08:12, बुध 4 जून
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अपरा एकादशी 2081 कब है?
मंगलवार 3 जून
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 3 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 4 जून
अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- मंगलवार 3 जून
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06:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 4 जून
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06:37–08:12पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में अपरा एकादशी मंगल 3 जून को क्यों है?
अपरा एकादशी मंगल 3 जून को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 06:12 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:12 से 07:33 मंगल तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:12 सोम से 07:33 तक।
द्वादशी: 07:33 मंगल से 08:12 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, सोम 2 जून को 06:37 और मंगल 3 जून को 06:37। एकादशी (सोम 2 जून 06:12 से मंगल 3 जून 07:33 तक) और द्वादशी (मंगल 3 जून 07:33 से बुध 4 जून 08:12 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: मंगल 3 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: सोम 2 जून को दशमी 06:12 तक है, उसके भीतर (05:01–06:37); मंगल 3 जून को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 4 जून, 06:37–08:12
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 3 जून 07:33 से बुध 4 जून 08:12 तक है; हरिवासर 13:43 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 4 जून को सूर्योदय (06:37) से होता है।
नियम
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।