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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में अपरा एकादशी 2029 पारण समय 07:46⁠–⁠20:28, शुक्र 8 जून

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में अपरा एकादशी 2029 कब है?

गुरुवार 7 जून

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 7 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 8 जून

पारण समय
07:46–20:28
12 घं 42 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 7 जून
  • 05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 8 जून
  • 07:46–20:28पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में अपरा एकादशी गुरु 7 जून को क्यों है?

अपरा एकादशी गुरु 7 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:51 बुध से 01:13 शुक्र तक।

एकादशी 01:13 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 22:51 बुध से 01:13 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 7 जून को सूर्योदय पर है, 05:29: गुरु 7 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:51 बुध पर, उससे (03:53–05:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 8 जून, 07:46–20:28 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 8 जून 01:13 से शनि 9 जून 03:25 तक है; हरिवासर 07:46 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:28) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:29 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।