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Pāthardi, महाराष्ट्र में अपरा एकादशी 2029 पारण समय 09:16⁠–⁠19:06, शुक्र 8 जून

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में अपरा एकादशी 2029 कब है?

गुरुवार 7 जून

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में गुरु 7 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 8 जून

पारण समय
09:16–19:06
9 घं 50 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 7 जून
  • 05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 8 जून
  • 09:16–19:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में अपरा एकादशी गुरु 7 जून को क्यों है?

अपरा एकादशी गुरु 7 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:21 से 02:43 शुक्र तक।

एकादशी 02:43 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:21 गुरु से 02:43 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 7 जून को सूर्योदय पर है, 05:50: गुरु 7 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:21 पर, उससे (04:14–05:50) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 8 जून, 09:16–19:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 8 जून 02:43 से शनि 9 जून 04:55 तक है; हरिवासर 09:16 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:06) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:29 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।