tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 2022 पारण समय 08:38⁠–⁠17:45, गुरु 26 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 2022 कब है?

बुधवार 25 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 25 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 26 मई

पारण समय
08:38–17:45
9 घं 7 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 25 मई
  • 06:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 26 मई
  • 08:38–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी बुध 25 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी बुध 25 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:02 से 02:24 गुरु तक।

एकादशी 02:24 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 02:02 बुध से 02:24 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 25 मई को सूर्योदय पर है, 06:34: बुध 25 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:02 पर, उससे (04:58–06:34) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 26 मई, 08:38–17:45 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 26 मई 02:24 से शुक्र 27 मई 03:18 तक है; हरिवासर 08:38 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:48 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।