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Pāthardi, महाराष्ट्र में अपरा एकादशी 2021 पारण समय 05:50⁠–⁠08:48, सोम 7 जून

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में अपरा एकादशी 2021 कब है?

रविवार 6 जून

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में रवि 6 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 7 जून

पारण समय
05:50–08:48
2 घं 58 मि

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 6 जून
  • 05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 7 जून
  • 05:50–08:48पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में अपरा एकादशी रवि 6 जून को क्यों है?

अपरा एकादशी रवि 6 जून को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:07 से 06:19 रवि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:07 शनि से 06:19 तक।

द्वादशी: 06:19 रवि से 08:48 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शनि 5 जून को 05:50 और रवि 6 जून को 05:50। एकादशी (शनि 5 जून 04:07 से रवि 6 जून 06:19 तक) और द्वादशी (रवि 6 जून 06:19 से सोम 7 जून 08:48 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: रवि 6 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 7 जून, 05:50–08:48

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 6 जून 06:19 से सोम 7 जून 08:48 तक है; हरिवासर 12:57 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 7 जून को सूर्योदय (05:50) से होता है।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।