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Myjava, स्लोवाकिया में अपरा एकादशी 2021 पारण समय 09:27⁠–⁠20:49, रवि 6 जून

व्रत · समय CEST में

Myjava में अपरा एकादशी 2021 कब है?

शनिवार 5 जून

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Myjava में शनि 5 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 6 जून

पारण समय
09:27–20:49
11 घं 22 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 5 जून
  • 04:48व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 6 जून
  • 09:27–20:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Myjava में अपरा एकादशी शनि 5 जून को क्यों है?

अपरा एकादशी शनि 5 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:37 से 02:49 रवि तक।

एकादशी 02:49 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:37 शनि से 02:49 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 5 जून को सूर्योदय पर है, 04:48: शनि 5 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:37 पर, उससे (03:12–04:48) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 6 जून, 09:27–20:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 6 जून 02:49 से सोम 7 जून 05:18 तक है; हरिवासर 09:27 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:00 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।