Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 2017 रवि 21 मई या सोम 22 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अपरा एकादशी 2017 कब है?
स्मार्त
रविवार 21 मई
वैष्णव
सोमवार 22 मई
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 21 मई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 22 मई
वैष्णव · मंगलवार 23 मई
अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 21 मई
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06:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 22 मई
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11:33–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 22 मई
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06:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 23 मई
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06:33–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में अपरा एकादशी रवि 21 मई या सोम 22 मई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अपरा एकादशी रवि 21 मई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 22 मई को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:12 से। एकादशी: 08:12 से 06:14 सोम तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:14 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:12 रवि से 06:14 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 21 मई को 08:12 पर, उस सूर्योदय (06:32) के बाद, लगती है और सोम 22 मई को 06:14 पर, अगले सूर्योदय (06:33 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 21 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 21 मई को अरुणोदय (04:56–06:32) में दशमी है। सोम 22 मई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 06:14 तक, फिर द्वादशी): सोम 22 मई।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 22 मई, 11:33–17:45 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 22 मई 06:14 से मंगल 23 मई 03:33 तक है; हरिवासर 11:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:47 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 23 मई, 06:33–17:45 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 23 मई को 03:33 पर, रात में, अरुणोदय (04:57) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:33) से सूर्यास्त (17:45) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।