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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1985 पारण समय 06:30⁠–⁠11:18, गुरु 16 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 1985 कब है?

बुधवार 15 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 15 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 16 मई

पारण समय
06:30–11:18
4 घं 48 मि

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 15 मई
  • 06:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 16 मई
  • 06:30–11:18पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी बुध 15 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी बुध 15 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:23 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:23 से 08:44 बुध तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:23 मंगल से 08:44 तक।

द्वादशी: 08:44 बुध से 11:18 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 14 मई को 06:30 और बुध 15 मई को 06:30। एकादशी (मंगल 14 मई 06:23 से बुध 15 मई 08:44 तक) और द्वादशी (बुध 15 मई 08:44 से गुरु 16 मई 11:18 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: बुध 15 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: मंगल 14 मई को दशमी 06:23 तक है, उसके भीतर (04:54–06:30); बुध 15 मई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 16 मई, 06:30–11:18

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 15 मई 08:44 से गुरु 16 मई 11:18 तक है; हरिवासर 15:23 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 16 मई को सूर्योदय (06:30) से होता है।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।