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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1958 पारण समय 06:30⁠–⁠09:57, गुरु 15 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 1958 कब है?

बुधवार 14 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 14 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 15 मई

पारण समय
06:30–09:57
3 घं 27 मि

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 14 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 15 मई
  • 06:30–09:57पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी बुध 14 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी बुध 14 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:47 से 07:22 बुध तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:47 मंगल से 07:22 तक।

द्वादशी: 07:22 बुध से 09:57 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 13 मई को 06:29 और बुध 14 मई को 06:29। एकादशी (मंगल 13 मई 04:47 से बुध 14 मई 07:22 तक) और द्वादशी (बुध 14 मई 07:22 से गुरु 15 मई 09:57 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: बुध 14 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 15 मई, 06:30–09:57

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 14 मई 07:22 से गुरु 15 मई 09:57 तक है; हरिवासर 14:01 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 15 मई को सूर्योदय (06:30) से होता है।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।