Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1951 बुध 30 मई या गुरु 31 मई
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अपरा एकादशी 1951 कब है?
स्मार्त
बुधवार 30 मई
वैष्णव
गुरुवार 31 मई
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 30 मई का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · गुरुवार 31 मई
वैष्णव · शुक्रवार 1 जून
अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- बुधवार 30 मई
-
06:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 31 मई
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12:36–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 31 मई
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06:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 1 जून
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06:36–07:40पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में अपरा एकादशी बुध 30 मई या गुरु 31 मई को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अपरा एकादशी बुध 30 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 31 मई को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:15 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:15 से 06:14 गुरु तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:14 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 05:15 बुध से 06:14 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 30 मई को सूर्योदय पर है, 06:35: बुध 30 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 30 मई को दशमी 05:15 तक है, अरुणोदय (04:59–06:35) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:14 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 31 मई को व्रत रखते हैं: गुरु 31 मई।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 31 मई, 12:36–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 31 मई 06:14 से शुक्र 1 जून 07:40 तक है; हरिवासर 12:36 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:49 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शुक्र 1 जून, 06:36–07:40
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 31 मई 06:14 से शुक्र 1 जून 07:40 तक है; हरिवासर 12:36 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 1 जून को सूर्योदय (06:36) से होता है।
नियम
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।