tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1942 पारण समय 06:28⁠–⁠17:49, सोम 11 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 1942 कब है?

रविवार 10 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 10 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 11 मई

पारण समय
06:28–17:49
11 घं 21 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 10 मई
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 11 मई
  • 06:28–17:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी रवि 10 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी रवि 10 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:07 शनि से 20:40 तक।

एकादशी 20:40 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 10 मई को सूर्योदय पर है, 06:28: रवि 10 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:07 शनि पर, उससे (04:52–06:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 11 मई, 06:28–17:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 10 मई 20:40 से सोम 11 मई 21:40 तक है; हरिवासर 02:55 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 11 मई को सूर्योदय (06:28) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:44 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।