tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1928 पारण समय 06:30⁠–⁠17:47, बुध 16 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 1928 कब है?

मंगलवार 15 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 15 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 16 मई

पारण समय
06:30–17:47
11 घं 17 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 15 मई
  • 06:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 16 मई
  • 06:30–17:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी मंगल 15 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी मंगल 15 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:37 से 00:07 बुध तक।

एकादशी 00:07 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 15 मई को सूर्योदय पर है, 06:30: मंगल 15 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:37 पर, उससे (04:54–06:30) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 16 मई, 06:30–17:47 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 16 मई 00:07 से बुध 16 मई 21:05 तक है; हरिवासर 05:22 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 16 मई को सूर्योदय (06:30) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:47) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:45 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।