tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अपरा एकादशी 1912 पारण समय 06:29⁠–⁠17:48, सोम 13 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अपरा एकादशी 1912 कब है?

रविवार 12 मई

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 12 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 13 मई

पारण समय
06:29–17:48
11 घं 19 मि · Tithika की परिपाटी

अपरा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 12 मई
  • 06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 13 मई
  • 06:29–17:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअपरा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अपरा एकादशी रवि 12 मई को क्यों है?

अपरा एकादशी रवि 12 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:03 शनि से 23:40 तक।

एकादशी 23:40 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 12 मई को सूर्योदय पर है, 06:22: रवि 12 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:03 शनि पर, उससे (04:46–06:22) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 13 मई, 06:29–17:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 12 मई 23:40 से सोम 13 मई 23:33 तक है; हरिवासर 05:38 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 13 मई को सूर्योदय (06:23) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:41) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:38 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · वैशाख कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।