tithika
English

Pāthardi, महाराष्ट्र में आमलकी एकादशी 2027 पारण समय 07:13⁠–⁠18:39, शुक्र 19 मार्च

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में आमलकी एकादशी 2027 कब है?

गुरुवार 18 मार्च

फाल्गुन शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में गुरु 18 मार्च का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 19 मार्च

पारण समय
07:13–18:39
11 घं 26 मि · Tithika की परिपाटी

आमलकी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 18 मार्च
  • 06:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 19 मार्च
  • 07:13–18:39पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंआमलकी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में आमलकी एकादशी गुरु 18 मार्च को क्यों है?

आमलकी एकादशी गुरु 18 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:21 से 01:51 शुक्र तक।

एकादशी 01:51 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 18 मार्च को सूर्योदय पर है, 06:35: गुरु 18 मार्च। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 04:21 पर, उससे (04:59–06:35) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 19 मार्च, 07:13–18:39 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 19 मार्च 01:51 से शुक्र 19 मार्च 23:17 तक है; हरिवासर 07:13 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:39) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:59 तक, करते हैं।

नियम

फाल्गुन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।