Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 2099 गुरु 10 सितंबर या शुक्र 11 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अजा एकादशी 2099 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 10 सितंबर
वैष्णव
शुक्रवार 11 सितंबर
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 10 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 11 सितंबर
वैष्णव · शनिवार 12 सितंबर
अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 10 सितंबर
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06:12व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 11 सितंबर
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08:07–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 11 सितंबर
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06:11व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 12 सितंबर
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06:10–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में अजा एकादशी गुरु 10 सितंबर या शुक्र 11 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अजा एकादशी गुरु 10 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 11 सितंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:44 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:44 से 02:46 शुक्र तक।
एकादशी 02:46 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:44 गुरु से 02:46 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 10 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:12: गुरु 10 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 10 सितंबर को दशमी 04:44 तक है, अरुणोदय (04:36–06:12) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:46 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 11 सितंबर को व्रत रखते हैं: शुक्र 11 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 11 सितंबर, 08:07–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 11 सितंबर 02:46 से शनि 12 सितंबर 00:10 तक है; हरिवासर 08:07 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:34 तक, करते हैं।
वैष्णव · शनि 12 सितंबर, 06:10–18:07 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 12 सितंबर को 00:10 पर, रात में, अरुणोदय (04:34) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:10) से सूर्यास्त (18:07) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।