Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 2094 पारण समय 06:15–10:07, सोम 6 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अजा एकादशी 2094 कब है?
रविवार 5 सितंबर
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 5 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 6 सितंबर
अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- रविवार 5 सितंबर
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06:16व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 6 सितंबर
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06:15–10:07पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में अजा एकादशी रवि 5 सितंबर को क्यों है?
अजा एकादशी रवि 5 सितंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:46 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:46 से 07:47 रवि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:46 शनि से 07:47 तक।
द्वादशी: 07:47 रवि से 10:07 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शनि 4 सितंबर को 06:17 और रवि 5 सितंबर को 06:16। एकादशी (शनि 4 सितंबर 05:46 से रवि 5 सितंबर 07:47 तक) और द्वादशी (रवि 5 सितंबर 07:47 से सोम 6 सितंबर 10:07 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: रवि 5 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शनि 4 सितंबर को दशमी 05:46 तक है, उसके भीतर (04:41–06:17); रवि 5 सितंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 6 सितंबर, 06:15–10:07
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 5 सितंबर 07:47 से सोम 6 सितंबर 10:07 तक है; हरिवासर 14:22 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 6 सितंबर को सूर्योदय (06:15) से होता है।
नियम
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।