tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 2083 पारण समय 06:14⁠–⁠18:07, बुध 8 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 2083 कब है?

मंगलवार 7 सितंबर

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 7 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 8 सितंबर

पारण समय
06:14–18:07
11 घं 53 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 7 सितंबर
  • 06:14व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 8 सितंबर
  • 06:14–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी मंगल 7 सितंबर को क्यों है?

अजा एकादशी मंगल 7 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:53 सोम से 22:16 तक।

एकादशी 22:16 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 7 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:14: मंगल 7 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:53 सोम पर, उससे (04:38–06:14) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 8 सितंबर, 06:14–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 7 सितंबर 22:16 से बुध 8 सितंबर 23:01 तक है; हरिवासर 04:27 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 8 सितंबर को सूर्योदय (06:14) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:36 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।