Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 2078 गुरु 1 सितंबर या शुक्र 2 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अजा एकादशी 2078 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 1 सितंबर
वैष्णव
शुक्रवार 2 सितंबर
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 1 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 2 सितंबर
वैष्णव · शनिवार 3 सितंबर
अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 1 सितंबर
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06:19व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 2 सितंबर
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11:46–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 2 सितंबर
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06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 3 सितंबर
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04:41–05:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में अजा एकादशी गुरु 1 सितंबर या शुक्र 2 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अजा एकादशी गुरु 1 सितंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 2 सितंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:09 से। एकादशी: 07:09 से 05:59 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:59 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:09 गुरु से 05:59 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 1 सितंबर को 07:09 पर, उस सूर्योदय (06:19) के बाद, लगती है और शुक्र 2 सितंबर को 05:59 पर, अगले सूर्योदय (06:18 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 1 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 1 सितंबर को अरुणोदय (04:43–06:19) में दशमी है। शुक्र 2 सितंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:59 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 2 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 2 सितंबर, 11:46–18:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 2 सितंबर 05:59 से शनि 3 सितंबर 05:08 तक है; हरिवासर 11:46 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:06) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:40 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 3 सितंबर, 04:41–05:08 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 3 सितंबर को 05:08 पर, अरुणोदय (04:41) लगने के बाद और सूर्योदय (06:17) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।