tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 2037 शनि 5 सितंबर या रवि 6 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 2037 कब है?

स्मार्त

शनिवार 5 सितंबर

वैष्णव

रविवार 6 सितंबर

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

Ipameri में शनि 5 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · रविवार 6 सितंबर

पारण समय
09:36–18:06
8 घं 30 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · सोमवार 7 सितंबर

पारण समय
06:14–18:06
11 घं 52 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शनिवार 5 सितंबर
  • 06:16व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 6 सितंबर
  • 09:36–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • रविवार 6 सितंबर
  • 06:15व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 7 सितंबर
  • 06:14–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी शनि 5 सितंबर या रवि 6 सितंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अजा एकादशी शनि 5 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव रवि 6 सितंबर को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:59 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:59 से 04:13 रवि तक।

एकादशी 04:13 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:59 शनि से 04:13 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 5 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:16: शनि 5 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 5 सितंबर को दशमी 05:59 तक है, अरुणोदय (04:40–06:16) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:13 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव रवि 6 सितंबर को व्रत रखते हैं: रवि 6 सितंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · रवि 6 सितंबर, 09:36–18:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 6 सितंबर 04:13 से सोम 7 सितंबर 01:45 तक है; हरिवासर 09:36 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:06) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:37 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · सोम 7 सितंबर, 06:14–18:06 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी सोम 7 सितंबर को 01:45 पर, रात में, अरुणोदय (04:38) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:14) से सूर्यास्त (18:06) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।