tithika
English

Pāthardi, महाराष्ट्र में अजा एकादशी 2032 पारण समय 06:14⁠–⁠18:43, बुध 1 सितंबर

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में अजा एकादशी 2032 कब है?

मंगलवार 31 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में मंगल 31 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 1 सितंबर

पारण समय
06:14–18:43
12 घं 29 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 31 अगस्त
  • 06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 1 सितंबर
  • 06:14–18:43पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में अजा एकादशी मंगल 31 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी मंगल 31 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 15:15 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 15:15 सोम से 17:03 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 31 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:13: मंगल 31 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 15:15 सोम पर, उससे (04:37–06:13) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 1 सितंबर, 06:14–18:43 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 31 अगस्त 17:03 से बुध 1 सितंबर 19:10 तक है; हरिवासर 23:35 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 1 सितंबर को सूर्योदय (06:14) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:43) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:44 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।