tithika
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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में अजा एकादशी 2030 पारण समय 07:45⁠–⁠19:43, रवि 25 अगस्त

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में अजा एकादशी 2030 कब है?

शनिवार 24 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शनि 24 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 25 अगस्त

पारण समय
07:45–19:43
11 घं 58 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 24 अगस्त
  • 06:19व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 25 अगस्त
  • 07:45–19:43पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में अजा एकादशी शनि 24 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी शनि 24 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:27 शुक्र से 01:24 रवि तक।

एकादशी 01:24 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 24 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:19: शनि 24 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:27 शुक्र पर, उससे (04:43–06:19) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 25 अगस्त, 07:45–19:43 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 25 अगस्त 01:24 से सोम 26 अगस्त 02:47 तक है; हरिवासर 07:45 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:43) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:00 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।