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Myjava, स्लोवाकिया में अजा एकादशी 2030 पारण समय 05:56⁠–⁠19:46, रवि 25 अगस्त

व्रत · समय CEST में

Myjava में अजा एकादशी 2030 कब है?

शनिवार 24 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Myjava में शनि 24 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 25 अगस्त

पारण समय
05:56–19:46
13 घं 50 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 24 अगस्त
  • 05:54व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 25 अगस्त
  • 05:56–19:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Myjava में अजा एकादशी शनि 24 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी शनि 24 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:27 शुक्र से 23:24 तक।

एकादशी 23:24 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 24 अगस्त को सूर्योदय पर है, 05:54: शनि 24 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:27 शुक्र पर, उससे (04:18–05:54) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 25 अगस्त, 05:56–19:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 24 अगस्त 23:24 से सोम 26 अगस्त 00:47 तक है; हरिवासर 05:45 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 25 अगस्त को सूर्योदय (05:56) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।