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Pāthardi, महाराष्ट्र में अजा एकादशी 2023 पारण समय 06:15⁠–⁠18:35, सोम 11 सितंबर

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में अजा एकादशी 2023 कब है?

रविवार 10 सितंबर

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में रवि 10 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 11 सितंबर

पारण समय
06:15–18:35
12 घं 20 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 10 सितंबर
  • 06:15व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 11 सितंबर
  • 06:15–18:35पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में अजा एकादशी रवि 10 सितंबर को क्यों है?

अजा एकादशी रवि 10 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 19:18 शनि से 21:28 तक।

एकादशी 21:28 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 10 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:15: रवि 10 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 19:18 शनि पर, उससे (04:39–06:15) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 11 सितंबर, 06:15–18:35 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 10 सितंबर 21:28 से सोम 11 सितंबर 23:52 तक है; हरिवासर 04:04 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 11 सितंबर को सूर्योदय (06:15) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:35) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:43 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।