Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में अजा एकादशी 2021 गुरु 2 सितंबर या शुक्र 3 सितंबर
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में अजा एकादशी 2021 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 2 सितंबर
वैष्णव
शुक्रवार 3 सितंबर
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Sevan में गुरु 2 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 3 सितंबर
वैष्णव · शनिवार 4 सितंबर
अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 2 सितंबर
-
06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 3 सितंबर
-
12:24–19:28पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 3 सितंबर
-
06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 4 सितंबर
-
06:30–06:54पारण समयव्रत खोलने का समय
Sevan में अजा एकादशी गुरु 2 सितंबर या शुक्र 3 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अजा एकादशी गुरु 2 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 3 सितंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:52 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:52 से 06:14 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:14 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:52 गुरु से 06:14 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 2 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:28: गुरु 2 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 2 सितंबर को दशमी 04:52 तक है, अरुणोदय (04:52–06:28) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:14 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 3 सितंबर को व्रत रखते हैं: शुक्र 3 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 3 सितंबर, 12:24–19:28 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 3 सितंबर 06:14 से शनि 4 सितंबर 06:54 तक है; हरिवासर 12:24 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:28) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:05 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 4 सितंबर, 06:30–06:54
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 3 सितंबर 06:14 से शनि 4 सितंबर 06:54 तक है; हरिवासर 12:24 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 4 सितंबर को सूर्योदय (06:30) से होता है।
नियम
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।