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Myshkin, यरोस्लावी ओब्लास्ट, रूस में अजा एकादशी 2021 पारण समय 11:24⁠–⁠19:18, शुक्र 3 सितंबर

व्रत · समय MSK में

Myshkin में अजा एकादशी 2021 कब है?

गुरुवार 2 सितंबर

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Myshkin में गुरु 2 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 3 सितंबर

पारण समय
11:24–19:18
7 घं 54 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 2 सितंबर
  • 05:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 3 सितंबर
  • 11:24–19:18पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Myshkin में अजा एकादशी गुरु 2 सितंबर को क्यों है?

अजा एकादशी गुरु 2 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:52 से 05:14 शुक्र तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:14 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:52 गुरु से 05:14 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 2 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:28: गुरु 2 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:52 पर, उससे (03:52–05:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 3 सितंबर, 11:24–19:18 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 3 सितंबर 05:14 से शनि 4 सितंबर 05:54 तक है; हरिवासर 11:24 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:18) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:16 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।