tithika
English

दिफ्फा, नाइजर में अजा एकादशी 2021 पारण समय 09:24⁠–⁠18:19, शुक्र 3 सितंबर

व्रत · समय WAT में

दिफ्फा में अजा एकादशी 2021 कब है?

गुरुवार 2 सितंबर

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

दिफ्फा में गुरु 2 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 3 सितंबर

पारण समय
09:24–18:19
8 घं 55 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 2 सितंबर
  • 05:58व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 3 सितंबर
  • 09:24–18:19पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

दिफ्फा में अजा एकादशी गुरु 2 सितंबर को क्यों है?

अजा एकादशी गुरु 2 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:52 से 03:14 शुक्र तक।

एकादशी 03:14 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 01:52 गुरु से 03:14 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+1)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 2 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:58: गुरु 2 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:52 पर, उससे (04:22–05:58) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 3 सितंबर, 09:24–18:19 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 3 सितंबर 03:14 से शनि 4 सितंबर 03:54 तक है; हरिवासर 09:24 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:19) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:26 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।