tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 2005 पारण समय 12:48⁠–⁠18:05, मंगल 30 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 2005 कब है?

सोमवार 29 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 29 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 30 अगस्त

पारण समय
12:48–18:05
5 घं 17 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 29 अगस्त
  • 06:22व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 30 अगस्त
  • 12:48–18:05पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी सोम 29 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी सोम 29 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:58 से 06:11 मंगल तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 06:11 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:58 सोम से 06:11 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 29 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:22: सोम 29 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:58 पर, उससे (04:46–06:22) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 30 अगस्त, 12:48–18:05 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 30 अगस्त 06:11 से बुध 31 अगस्त 08:36 तक है; हरिवासर 12:48 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:05) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।