tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 1986 पारण समय 07:54⁠–⁠18:05, रवि 31 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 1986 कब है?

शनिवार 30 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 30 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 31 अगस्त

पारण समय
07:54–18:05
10 घं 11 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 30 अगस्त
  • 06:21व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 31 अगस्त
  • 07:54–18:05पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी शनि 30 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी शनि 30 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:36 शुक्र से 01:32 रवि तक।

एकादशी 01:32 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 30 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:21: शनि 30 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:36 शुक्र पर, उससे (04:45–06:21) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 31 अगस्त, 07:54–18:05 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 31 अगस्त 01:32 से सोम 1 सितंबर 03:00 तक है; हरिवासर 07:54 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:05) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:41 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।