tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 1966 पारण समय 06:11⁠–⁠18:07, सोम 12 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 1966 कब है?

रविवार 11 सितंबर

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 11 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 12 सितंबर

पारण समय
06:11–18:07
11 घं 56 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 11 सितंबर
  • 06:12व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 12 सितंबर
  • 06:11–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी रवि 11 सितंबर को क्यों है?

अजा एकादशी रवि 11 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:40 से। एकादशी: 08:40 से 06:19 रवि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:40 शनि से 06:19 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 11 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:12: रवि 11 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:40 शनि पर, उससे (04:36–06:12) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 12 सितंबर, 06:11–18:07 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी सोम 12 सितंबर को 03:21 पर, रात में, अरुणोदय (04:35) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:11) से सूर्यास्त (18:07) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।