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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 1943 पारण समय 06:24⁠–⁠09:26, शुक्र 27 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 1943 कब है?

गुरुवार 26 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 26 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 27 अगस्त

पारण समय
06:24–09:26
3 घं 2 मि

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 26 अगस्त
  • 06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 27 अगस्त
  • 06:24–09:26पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी गुरु 26 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी गुरु 26 अगस्त को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:34 से 06:52 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:34 बुध से 06:52 तक।

द्वादशी: 06:52 गुरु से 09:26 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 25 अगस्त को 06:25 और गुरु 26 अगस्त को 06:25। एकादशी (बुध 25 अगस्त 04:34 से गुरु 26 अगस्त 06:52 तक) और द्वादशी (गुरु 26 अगस्त 06:52 से शुक्र 27 अगस्त 09:26 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 26 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 27 अगस्त, 06:24–09:26

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 26 अगस्त 06:52 से शुक्र 27 अगस्त 09:26 तक है; हरिवासर 13:31 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 27 अगस्त को सूर्योदय (06:24) से होता है।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।