tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 1938 पारण समय 06:27⁠–⁠18:03, सोम 22 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 1938 कब है?

रविवार 21 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 21 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 22 अगस्त

पारण समय
06:27–18:03
11 घं 36 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 21 अगस्त
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 22 अगस्त
  • 06:27–18:03पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी रवि 21 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी रवि 21 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:22 से 21:30 तक।

एकादशी 21:30 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 21 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:28: रवि 21 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:22 पर, उससे (04:52–06:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 22 अगस्त, 06:27–18:03 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 21 अगस्त 21:30 से सोम 22 अगस्त 18:20 तक है; हरिवासर 02:43 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 22 अगस्त को सूर्योदय (06:27) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:03) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:46 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।