Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 1917 पारण समय 06:32–08:25, मंगल 14 अगस्त
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अजा एकादशी 1917 कब है?
सोमवार 13 अगस्त
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 13 अगस्त का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
मंगलवार 14 अगस्त
अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- सोमवार 13 अगस्त
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06:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 14 अगस्त
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06:32–08:25पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में अजा एकादशी सोम 13 अगस्त को क्यों है?
अजा एकादशी सोम 13 अगस्त को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:22 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:22 से 06:39 सोम तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:22 रवि से 06:39 तक।
द्वादशी: 06:39 सोम से 08:25 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, रवि 12 अगस्त को 06:33 और सोम 13 अगस्त को 06:33। एकादशी (रवि 12 अगस्त 05:22 से सोम 13 अगस्त 06:39 तक) और द्वादशी (सोम 13 अगस्त 06:39 से मंगल 14 अगस्त 08:25 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: सोम 13 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: रवि 12 अगस्त को दशमी 05:22 तक है, उसके भीतर (04:57–06:33); सोम 13 अगस्त को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 14 अगस्त, 06:32–08:25
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 13 अगस्त 06:39 से मंगल 14 अगस्त 08:25 तक है; हरिवासर 13:06 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 14 अगस्त को सूर्योदय (06:32) से होता है।
नियम
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।