Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 1913 बुध 27 अगस्त या गुरु 28 अगस्त
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में अजा एकादशी 1913 कब है?
स्मार्त
बुधवार 27 अगस्त
वैष्णव
गुरुवार 28 अगस्त
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 27 अगस्त का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · गुरुवार 28 अगस्त
वैष्णव · शुक्रवार 29 अगस्त
अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- बुधवार 27 अगस्त
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06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 28 अगस्त
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11:39–18:04पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 28 अगस्त
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06:23व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 29 अगस्त
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06:22–18:05पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में अजा एकादशी बुध 27 अगस्त या गुरु 28 अगस्त को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में अजा एकादशी बुध 27 अगस्त को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव गुरु 28 अगस्त को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:01 से। एकादशी: 08:01 से 06:10 गुरु तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 06:10 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:01 बुध से 06:10 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह बुध 27 अगस्त को 08:01 पर, उस सूर्योदय (06:17) के बाद, लगती है और गुरु 28 अगस्त को 06:10 पर, अगले सूर्योदय (06:16 गुरु) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: बुध 27 अगस्त।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 27 अगस्त को अरुणोदय (04:41–06:17) में दशमी है। गुरु 28 अगस्त को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 06:10 तक, फिर द्वादशी): गुरु 28 अगस्त।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 28 अगस्त, 11:39–18:04 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 28 अगस्त 06:10 से शुक्र 29 अगस्त 03:40 तक है; हरिवासर 11:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:58) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:37 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शुक्र 29 अगस्त, 06:22–18:05 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 29 अगस्त को 03:40 पर, रात में, अरुणोदय (04:40) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:16) से सूर्यास्त (17:58) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।