tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में अजा एकादशी 1903 पारण समय 06:29⁠–⁠18:03, गुरु 20 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में अजा एकादशी 1903 कब है?

बुधवार 19 अगस्त

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 19 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 20 अगस्त

पारण समय
06:29–18:03
11 घं 34 मि · Tithika की परिपाटी

अजा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 19 अगस्त
  • 06:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 20 अगस्त
  • 06:29–18:03पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंअजा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में अजा एकादशी बुध 19 अगस्त को क्यों है?

अजा एकादशी बुध 19 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 09:48 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 09:48 मंगल से 06:57 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 19 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:23: बुध 19 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 09:48 मंगल पर, उससे (04:47–06:23) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 20 अगस्त, 06:29–18:03 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 20 अगस्त को 03:40 पर, रात में, अरुणोदय (04:46) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:22) से सूर्यास्त (17:56) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · श्रावण कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।